लाह उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय मजबूत करने पर जोर, गांव पहुंचीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की

सिमडेगा:झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मंगलवार को सिमडेगा के अपने प्रथम दौरे के दौरान जलडेगा के कोनमेरला केउन्दटोली और ठेठईटांगर के कहुपानी गांव पहुंचकर किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने जंगल क्षेत्र में कुसुम, बेर और पलाश के पेड़ों पर हो रही लाह की खेती का निरीक्षण किया तथा कोनमेरला पारिस मैदान के समीप आयोजित लाह प्रसंस्करण कार्यशाला में किसानों की समस्याएं सुनीं।निरीक्षण के दौरान कई कुसुम पेड़ों पर अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने पर मंत्री ने किसानों, मास्टर ट्रेनरों और अधिकारियों से जानकारी ली। विशेषज्ञों ने बताया कि लाह का बीहन चढ़ाने का उचित समय जनवरी-फरवरी है। बारिश में बीहन चढ़ाने से उसके झड़ने की संभावना रहती है। किसानों ने समय पर बीहन उपलब्ध नहीं होने, लाह कीट के मरने और प्रशिक्षण के बावजूद उत्पादन प्रभावित होने की समस्याएं बताईं। कुछ किसानों ने बेर के पेड़ों पर बेहतर उत्पादन की जानकारी भी साझा की।मंत्री ने समय पर गुणवत्तापूर्ण बीहन उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए सिमडेगा में 50 से 100 एकड़ के क्लस्टर विकसित कर लाह उत्पादन के साथ बीहन उत्पादन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि जंगल तभी सुरक्षित रहेंगे, जब स्थानीय लोगों को उनसे आय का साधन मिलेगा। कुसुम, बेर और पलाश जैसे पेड़ों पर वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन कर किसान अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक अच्छे पेड़ से लगभग 24 हजार से 50 हजार रुपये तक आय की संभावना है।मंत्री ने कहा कि सरकार योजनाएं बंद कमरों में नहीं, बल्कि किसानों के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं के आधार पर तैयार करना चाहती है। उन्होंने पलायन रोकने के लिए गांव में ही रोजगार और आय के साधन विकसित करने, किसानों को लैम्प्स-पैक्स से जोड़ने तथा पांच दिवसीय लाह प्रशिक्षण का लाभ लेने की अपील की। प्रशिक्षण में कटाई-छंटाई, बीहन चढ़ाने का समय, कीट प्रबंधन और वैज्ञानिक उत्पादन की जानकारी दी जाती है। उन्होंने टपक सिंचाई, किसान समृद्धि योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए गांव स्तर पर गोष्ठियां आयोजित करने का निर्देश दिया।विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि कोनमेरला क्षेत्र हाथियों से प्रभावित है, जिससे किसान खेती से हिचक रहे हैं। ऐसे में लाह उत्पादन वैकल्पिक आय का मजबूत साधन बन सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने विधानसभा में किसानों की समस्या उठाई थी और मंत्री ने लाह उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। उन्होंने मंत्री के जमीनी निरीक्षण की सराहना की।कार्यशाला में करंज, महुआ, साल बीज, कुसुम और लाह सहित वन उपज के संग्रह, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव की जानकारी दी गई। किसानों को संगठन बनाकर सामूहिक बिक्री करने की सलाह दी गई। कहुपानी में मत्स्य कृषकों को मछली कटिंग टूल किट, एक किसान को टाटा मैजिक मालवाहक वाहन तथा कृषि विभाग की ओर से दो सोलर पैनल मोटर पंप दिए गए। जेएसएलपीएस की दीदियों और स्कूली बच्चियों ने गीत प्रस्तुत कर मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, अग्रणी बैंक प्रबंधक सहित जिला एवं रांची से आए अधिकारी, विशेषज्ञ और अन्य संबंधित कर्मी मौजूद रहे।